Indian Army Strength in Future Plan with Modernization

Indian Army का आधुनिकीकरण

वर्तमान समय में Indian Army बदलाव के दौर से गुजर रही है। सामरिक नीतियों में रक्षा क्षेत्र का महत्व बढ़ता ही जा रहा है। भारत क्षेत्रीय शक्ति से वैश्विक शक्ति बनने की राह पर अग्रसर है और इन सबके बीच Indian Army का आधुनिकीकरण किया जाना अत्यंत ही महत्वपूर्ण है।
      परंपरागत और अप्रचलित हथियारों को आधुनिक हथियारों से बदलने की आवश्यकता तो है ही, साथ में यह भी आवश्यक है कि Indian Army
 को बदलते वक़्त की चुनोतियों के अनुरूप बनाया जाए। इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय अब स्वदेश निर्मित अस्त्र-शस्त्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और इस कार्य में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
       

देश की सीमाओं पर संवेदनशीलता बढ़ती जा रही है और ऐसे में हमें अपनी Indian Army का आधुनिकीकरण करना होगा और इसके लिए Indian Army को नए उपकरणों एवं तकनीकों से लैस करना होगा। पुरानी तकनीकों तथा उपकरणों को नवीनतम और आधुनिक तकनीकों तथा उपकरणों से बदलना होगा। इसके लिए सरकार उपकरणों के स्वदेशीकरण के प्रयास भी कर रही है।
       

पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पारिकर ने लेफ्टिनेंट जनरल TV शेखावत के नेतृत्व में 112 सदस्य समिति का गठन किया था, जो थल वायु और नौसेना के मौजूदा ताने-बाने में बदलाव लाने के लिए अपने सुझाव देगी और फालतू तंत्र की काट छांट करने के साथ-साथ रखरखाव के खर्चे को कम करने के लिए उपाय सुझाए की।
 

        समिति की सिफारिशों से उन पदों को समाप्त किया जा सकेगा, जो तकनीकी उन्नति के चलते अब बेमानी हो चुके हैं, समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि आधुनिकीकरण का यह मतलब नहीं कि सुरक्षा सैनिकों की गिनती में भी इजाफा हो जाए।
 

      इस सोच के पीछे सरकार के पास दो मुख्य कारण थे, एक तो सैनिकों की तनख्वाह और रखरखाव के खर्चे में लगातार वृद्धि इससे कुल रक्षा बजट का 20 फ़ीसदी से भी कम हिस्सा हथियारों और उपकरणों के आधुनिकीकरण के लिए बचता है। दूसरा कारण है दिसंबर 2015 में Indian Army के सम्मिलित कमांडर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह सुझाव जिसमें उन्होंने कहा था कि ऐसे वक्त में जहां दुनिया की अन्य मुख्य ताकते अपनी सेना की संख्या में कटौती कर रही है और तकनीक पर ज्यादा निर्भर ताला रही हैं। वही हम आज भी अपनी Indian Army की संख्या बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहे हैं।
 

       दरअसल उपरोक्त निर्णय लेने की वजह रक्षा बजट में उपलब्ध पैसे की कमी है, पिछले एक दशक से रक्षा बजट में कुल सकल उत्पादन का प्रतिशत घटता ही जा रहा है। हालांकि साल 2015-16 के वित्त वर्ष के लिए तय किए गए बजट प्रावधानों के मुकाबले रक्षा बजट में 1.6% की वृद्धि की गई है। लेकिन यदि इनमें रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए 18295 करोड़ रुपयों को भी मिले तो रकम में यह इजाफा लगभग 9% बैठता है। यहां पर पेच यह है कि इस पैसे में मुद्रास्फीति डॉलर के मुकाबले रुपए का अवमूल्यन और हथियारों एवं उपकरणों की कीमतों में बेतहाशा वैश्विक वृद्धि शामिल नहीं है।
 

        वर्तमान समय को देखते हुए Indian Army में भी आधुनिकीकरण अति आवश्यक है। डिजिटल इंडिया अथवा मेक इन इंडिया के तहत चलाई जाने वाली योजनाएं Indian Army के आधुनिकीकरण में बेहद लाभकारी हो रही है, क्योंकि प्रत्येक देश अपनी सेना को आधुनिक दौर में लाने के लिए सैन्य क्षमता को कम करके उनको नए उपकरणों से लैस कर रहे हैं। इसलिए भारतीय सरकार को Indian Army के आधुनिकीकरण के बारे में गहन विचार करना चाहिए|

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Narender Sharma

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