Jyotishye Rajyog of becoming an IAS Officer in your Kundli Horoscope | Astrologer Myuresh Bhargave

Jyotishye Rajyog of becoming an IAS Officer in your Kundli Horoscope

There are large number of rajyog in Kundli Vigyan and there are different - yogs for different -1 career, different -1 field perception in horosocpe.

Here we are explaining rajyog to become an IAS Officer. If we see that IAS post exam is the top most exam of Indian Competitive exam. Today, Lakhs of candidates are appearing for this IAS competitive exam and vacancy posts are very limited.

just Few best candidates get success in this IAS competitive exam. If we see astrological point of view, then those few candidates got success in IAS competitve exam means they have something special rajyog or some strong yog of planets in their horoscope. that 's why they achieve their target among the lakhs of candidates.

Today, Everybody wants to go on higher post or want to sit on big administration seat but few people are from crores. Why it is ? It is because of their strong Planetery Position in their horoscope.

See ,what are the rajyog to become an IAS Officer in horoscope. please read complete...  

जानिए आपकी कुंडली में भी है प्रशासनिक अधिकारी बनने के योग:

कुण्डली में बनने वाले योग ही बताते है कि व्यक्ति की आजीविका का क्षेत्र क्या रहेगा। प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश की लालसा अधिकांश लोगों में रहती है, बनते बिरले ही हैं। 

आई. ए. एस. जैसे उच्च पद की प्राप्ति के लिये व्यक्ति की कुण्डली में सर्वप्रथम शिक्षा का स्तर सर्वोत्तम होना चाहिए।

कुंडली के दूसरे, चतुर्थ, पंचम एवं नवम भाव भावेशों के बली होने पर जातक की शिक्षा उत्तम होती है। शिक्षा के कारक ग्रह बुध, गुरु व मंगल बली होने चाहिए, यदि ये बली हैं तो विशिष्ट शिक्षा मिलती है और जातक के लिए सफलता का मार्ग खोलती है।

आईये देखें कि कौन से योग प्रशासनिक अधिकारी के कैरियर में आपको सफलता दिला सकते हैं:
 

1. छठा, पहला व दशम भावभावेश बली हों तो प्रतियोगी परीक्षा में सफलता अवश्य मिलती है। सफलता के लिये समर्पण, एकाग्रता एवं परिश्रम की आवश्यकता होती है। इसका बोध तीसरे भाव एवं तृतीयेश के बली होने पर होता है। यदि ये बली हैं तो जातक में समर्पण, एकाग्रता एवं परिश्रम करने की क्षमता होती है और व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा में सफलता की मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

2.सूर्य को राजा और गुरु को ज्ञान का कारक कहा गया है। ये दोनों ग्रह मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रतियोगिताओं में सफलता और उच्च पद प्राप्ति में सहायक हैं।

3. जनता से अधिक वास्ता पड़ता है इसलिए शनि का बली होना अत्यन्त आवश्यक है। शनि जनताप्रशासनिक अधिकारियों के बीच की कड़ी है।

4.मंगल को स्याहीबुध को कलम कहा जाता है और ये बली हों तो जातक अपनी कलम का लोहा नौकरी में अवश्य मनवाता है।

 5. किसी भी प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा में सफलता के लिये लग्न, षष्टम, तथा दशम भावो/ भावेशों का शक्तिशाली होना तथा इनमे पारस्परिक संबन्ध होना आवश्यक है। ये भाव/ भावेश जितने समर्थ होगें और उनमें पारस्परिक सम्बन्ध जितने गहरे होगें उतनी ही उंचाई तक व्यक्ति जा सकेगा।

6. सफलता के लिये पूरी तौर से समर्पण तथा एकाग्र मेहनत की आवश्यकता होती है। इन सब गुणों का बोध तीसरा घर कराता है, जिससे पराक्रम के घर के नाम से जाना जाता है। तीसरा भाव इसलिये भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दशम घर से छठा घर है। इस घर से व्यवसाय के शत्रु देखे जाते है।

7. इसके बली होने से व्यक्ति में व्यवसाय के शत्रुओं से लडऩे की क्षमता आती है। यह घर उर्जा देता है। जिससे सफलता की उंचाईयों को छूना संभव हो पाता है।
 

8. कुण्डली के सभी ग्रहों में सूर्य को राजा की उपाधि दी गई है तथा गुरु को ज्ञान का कारक कहा गया है। ये दो ग्रह मुख्य रुप से प्रशासनिक प्रतियोगिताओं में सफलता और उच्च पद प्राप्ति में सहायक ग्रह माने जाते हैं। जिनमें इनका योग बनता है, ऐसे अधिकारियों के मुख्यकार्य मुख्य रुप से जनता की सेवा करना है।
 

9. उनके लिये शनि का महत्व अधिक हो जाता है क्योकि शनि जनता व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच के सेतू है। कई प्रशासनिक अधिकारी नौकरी करते समय भी लेखन को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने में सफल हुए है। यह मंगल व बुध की कृपा के बिना संभव नहीं है। 
 

10.प्रशासनिक अधिकारी मे चयन के लिये सूर्य, गुरु, मंगल, राहु व चन्द्र आदि ग्रह बलिष्ठ होने चाहिए।

11.मंगल से व्यक्ति में साहस, पराक्रम व जोश आता है जो प्रतियोगिताओं में सफलता की प्राप्ति के लिये अत्यन्त आवश्यक है।

12.भाव एकादश का स्वामी नवम घर में हो या दशम भाव के स्वामी से युति या दृष्ट हो तो व्यक्ति के प्रशासनिक अधिकारी बनने की संभावना बनती है।

 

13.पंचम भाव में उच्च का गुरु या शुक्र होने पर उसपर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तथा सूर्य भी अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति इन्ही ग्रहों की दशाओं में उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है।
 

14.लग्नेश और दशमेश स्वग्रही या उच्च के होकर केन्द्र या त्रिकोण में हो और गुरु उच्च का या स्वग्रही हो तो भी व्यक्ति की प्रशासनिक अधिकारी बनने की प्रबल संभावना होती है।
 

15.प्रशासनिक अधिकारी बनकर सफलता पाने के लिए सूर्य, गुरु, मंगल, राहु व चन्द्र आदि ग्रह बली होने चाहिए।
 

16.सूर्य से नेतृत्व करने की क्षमता मिलती है, गुरु से विवेक सम्मत निर्णय लेने की क्षमता मिलती है और चन्द्र से शालीनता आती है एवं मस्तिष्क स्थिर रहता है।
 

17. यदि कुण्डली में अमात्यकारक ग्रह बली है अर्थात् स्वराशि, उच्च या वर्गोत्तम में है एवं केन्द्र में हो या तीसरे या दसवें हो तो अत्यन्त उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
 

18.एकादशेश नौवें भाव में हो या दशमेश के साथ युत में हो या दृष्ट हों तो जातक में प्रशासनिक अधिकारी बनने की संभावना होती है।

 

These were some yoga astrological points for becoming an I.A.S. officer or other officer post in Indian Government. Hope you loved these points.

if  you have an doubt or question or want to know yoga regarding I.A.S. officer goal in your kundli horoscope,then you can contact below:

Thanks

 


ज्योतिषाचार्य मयूरेश  शास्त्री  (M.A.B.ed)

P.G Diploma in vaastushastra 

Diploma in medical astrology

Specailist in GemStones

Mob :- +91-9254144009 

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ASTROLOGER MAYURESH BHARGAVE

ASTROLOGY IS A VEDIC SCIENCE WHICH IS CREATED BY OUR ANCIENT SAINTS IN VEDAS AND PURANAS

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